श्री परमधाम मेरठ में राष्ट्रध्वज व क्रांतिकारियों के स्मारक के निर्माण में सहयोग करें...

राष्ट्रध्वज की स्थापना क्रांतिकारियों की स्मृतियों के बिना अधूरी है। राष्ट्रध्वज का तभी सम्मान है जब हम राष्ट्रध्वज के साथ क्रांतिकारियों को भी याद रखें। किसी भी राष्ट्र का राष्ट्रध्वज उस राष्ट्र के क्रांतिकारियों की पगड़ी होता है। इसीलिये राष्ट्रध्वज की स्थापना के साथ, राष्ट्रध्वज के आस-पास क्रांतिकारियों के स्मारकों और उनकी यातनाओं का भी उल्लेख होना चाहिये। ऐसे क्रांतिकारियों के स्मारकों की स्थापना ज्यादा होना चाहिये जो इस समय गुमनामी में हैं , जैसे शहीद शिरोमणि अल्लूरी सीताराम राजू, सूर्यसेन, बिरसा मुण्डा, कल्पना दत्ता, प्रीतिलता, ऊदा देवी, मैडम भीकाजी कामा इत्यादि। क्रंातिकारी ही हम हिन्दुस्तानियों के वास्तविक माता-पिता हैं। हमारे लिये जितने कष्ट व यातनायें उन्होंने सही, उतनी हमारें संसारिक माता-पिता भी नहीं सह सकते। परमात्मा भी हमारी पूजा तभी स्वीकार करेगा, जब हम क्रांतिकारियों के "सपने, सम्मान और शक्ति" के प्रति पहले स्वयं जागरूक होंगे तथा दूसरों को जागरूक करेंगे।
क्रांतिकारियों के सपने को धारण करने के लिये -
देश में जातिरहित एकजुटता का प्रयास करना इत्यादि।
क्रांतिकारियों के सम्मान को धारण करने के लिये -
क्रांतिकारियों को हृदय से वास्तविक माँ-पिता मानना और नशे व ढोंग का त्याग करना।
क्रांतिकारियों की शक्ति को धारण करने केे लिये -
अध्यात्म को स्वीकार करना।
श्री परमधाम अरिहन्तपुरम वलीदपुर दौराला मेरठ में भारतीय राष्ट्रध्वज के साथ गुमनाम क्रांतिकारियों के स्मारक की स्थापना करने जा रहा है। आप सभी से अनुरोध है कि इस पुण्य कार्य में तन, मन, धन से सहयोग करें।

श्री परमधाम मेरठ में राष्ट्रध्वज व क्रांतिकारियों के स्मारक के निर्माण में सहयोग करें|

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