जनेऊँ क्रांति परिचय

Paramdham|Janeu Kranti
चन्द्रमोहन (क्रांतिगुरु)

श्री परमधाम, अरिहंतपुरम, वलीदपुर दौराला, मेरठ, उत्तर प्रदेश

"जनेऊँ क्रांति" क्या है ?


‘जनेऊँ’ के तीनों अक्षरों को दिल-दिमाग में उतारना व इसके लिये कार्य करना ही ‘‘जनेऊँ क्रांति’’ है। ‘जनेऊँ’ के तीन अक्षरों से ही मानवतावाद की स्थापना हो सकती है। ‘जनेऊँ’ में ही मानवता का पूरा रहस्य छिपा हुआ है। श्री परमधाम का मानना है कि क्रांतिकारी ‘जनेऊँ’ के सूत्रों को जानते थे। इसीलिये शहीद शिरोमणि चन्द्रशेखर आजाद, भगत सिंह, बिरसा मुंडा, अल्लूरी सीताराम राजू इत्यादि ‘जनेऊँ’ धारण करते थे। शहीद शिरोमणि भगत सिंह जी के बारे में एक घटना का जिक्र मिलता है कि जब भगत सिंह जी के पिता उनके जेल जाने के कारण दुःखी थे तो भगत सिंह जी ने अपने पिता को एक पत्र लिखा और कहा कि ‘‘ पिताजी जब आपने मेरा 'जनेऊँ' संस्कार करवाया था आपने तो मुझे तभी देश को सौंप दिया था अब चिंता क्यों करते हो।’’ इससे यह सिद्ध होता है कि ‘जनेऊँ’ के वास्तविक अर्थ को क्रांतिकारी ही जानते थे। 'जनेऊँ' धारण करने का अर्थ ही है कि हम पर पहला अधिकार देश का है देशवासियों के उत्थान का है। 
श्री परमधाम मानता है कि क्रांतिकारी ही हमारे वास्तविक माता-पिता हैं। जितने घोर कष्ट उन्होंने हमारे सम्मान के लिये सहे उतने कष्ट तो हमारे संसारिक माता-पिता भी नहीं सकते। उन्होंने हमारे लिये इतनी घोर यातनाओं को सहा कि जिसकी कल्पना करना भी कठिन है। परमात्मा भी हमारी पूजा-पाठ-व्रत-दान-तीर्थ इत्यादि को तभी स्वीकार करेगा जब हम क्रांतिकारियों के सपने, सम्मान और शक्ति के प्रति स्वयं जागरूक होंगे तथा औरों को भी जागरूक करेंगे। 
वास्तव में क्रांतिकारियों के सपने, सम्मान और शक्ति के प्रति जागरूकता ही 'जनेऊँ' के सूत्रों को धारण करना है और यही क्रांतिकारियों का राष्ट्रध्वज के रंगो के माध्यम से समस्त हिन्दुस्तानियों को संदेश भी है। 'जनेऊँ' के सूत्रों को सीधे समझा जाता है अर्थात् ज-ने-ऊँ जन पूजा-नैतिक पूजा-अध्यात्म पूजा परन्तु 'जनेऊँ' को उल्टा धारण किया जाता है अर्थात् ऊँ-ने-ज अध्यात्म पूजा-नैतिक पूजा-जन पूजा। इसीलिये क्रांतिकारियों ने राष्ट्रध्वज के रंगो का क्रम इसी प्रकार रखा अर्थात् - 
ऊँ - केसरिया रंग - अध्यात्म पूजा - क्रांतिकारियों की शक्ति - 

  1. प्रकृति से प्रेम करना। (वृक्षों को शंकर, जल स्त्रोत को विष्णु, वायुमण्डल को ब्रह्मा मानना)
  2. अन्तः पूजा व अन्तः ज्ञान को स्वीकार करना
  3. पंचदेवों (विद्यार्थी, मजदूर, किसान, कर्मचारी, व्यापारी) व असहायों (विकलांग, वृद्ध व बच्चे) की सेवा करना।

ने - सफेद रंग - नैतिक पूजा - क्रांतिकारियों का सम्मान - 

  1. क्रांतिकारियों को दिल से अपना वास्तविक माता-पिता मानना।
  2. नशे का त्याग करना क्योंकि नशा करना क्रांतिकारियों का अपमान है।
  3. ढोंग का त्याग करना क्योंकि ढोंग करना क्रांतिकारियों का अपमान है।

ज- हरा रंग - जन पूजा - क्रांतिकारियों का सपना-

  1. जातिरहित एकजुटता का प्रयास।
  2. पढ़ाई-दवाई-एक खिलाई एक समान व फ्री का प्रयास।
  3. समय पर न्याय की गारण्टी का प्रयास इत्यादि।

नीला रंग - उपरोक्त को गहराई से धारण करना। चक्र - 24 घंटे हृदय में रखना।

केसरिया रंग - ऊँ - अध्यात्म पूजा - क्रांतिकारियों की शक्ति
सफेद रंग - ने - नैतिक पूजा - क्रांतिकारियों का सम्मान
हरा रंग - ज - जन पूजा - क्रांतिकारियों का सपना

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श्री परमधाम

अरिहंत पुरम,वलीदपुर दौराला,
जिला. मेरठ
, उत्तर प्रदेश (भारत)

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