जनेऊँ क्रांति परिचय

Paramdham|Janeu Kranti
चन्द्रमोहन (क्रांतिगुरु)

श्री परमधाम, अरिहंतपुरम, वलीदपुर दौराला, मेरठ, उत्तर प्रदेश

ज- जन पूजा - क्रांतिकारियों का सपना यह है -


1. जाति व्यवस्था रहित व्यवस्था इसके लिये एकजुट आरक्षण नीति लागू कराने का प्रयास। 
2. पढ़ाई-दवाई-एक खिलाई एक समान व फ्री कराने का प्रयास। 
3. समय के साथ न्याय की गारण्टी कराने का प्रयास। 

1. जाति व्यवस्था रहित व्यवस्था इसके लिये एकजुट आरक्षण नीति लागू कराना - 

"हमारी ताकत बढ़ेगी कब? जाति-व्यवस्था खत्म होगी जब।"

"जब हमारे पुरखे एक, फिर क्यों जाति-भेद ?"

"जब जाति-व्यवस्था का नाश तब एकजुटता की आस।"

"एकजुटता का होगा असर - सबको आदर, अधिकार और अवसर।"


आज हमारे देश में चुनाव में केवल 5% सीट ही ऐसी हो सकती हैं जहाँ जाति-व्यवस्था का कम प्रभाव होता है, 95% सीटों पर जाति-व्यवस्था का पूरा प्रभाव रहता है। चुनाव में जाति-व्यवस्था पूरी तरह प्रभावी रहती है और जाति-व्यवस्था से ही जातिवादी राजनीति पैदा होती है। जातिवादी राजनीति से ही भ्रष्ट राजनीति पैदा होती है। भ्रष्ट राजनीति से ही भ्रष्टाचार, अत्याचार, दुराचार और माओवाद, पूँजीवाद, आतंकवाद इत्यादि पैदा होते हैं।
आज चुनाव में योग्य आदमी का महत्व कम होता है और जाति-व्यवस्था का महत्व ज्यादा होता है। आदमी अच्छा हो या बुरा इससे कोई मतलब नहीं है। मतलब इससे है कि वह पहले मेरी जाति का होना चाहिए या मेरी जाति के द्वारा समर्थन किया हुआ होना चाहिए। चुनाव में व्यक्ति की योग्यता पीछे छूट जाती है, अनदेखी कर दी जाती है जबकि जाति-व्यवस्था आगे आ जाती है। जाति-व्यवस्था ही पूरे चुनाव में छायी रहती है। जातिवादी राजनीति के कारण हम बंट रहे हैं, लड़ रहे हैं, लुट रहे हैं। इस कारण ही हमारे बीच में दूरियाँ बनी हुई हैं। जातिवादी राजनीति का उद्देश्य मात्र व्यक्तिगत स्वार्थ पूर्ति होता है। इस समय जातिवादी राजनीति ही देश पर हावी है।
आज तक भ्रष्टाचार के विरोध में जितने भी आन्दोलन हुये उनमें जाति-भेद के विरोध में कुछ भी नहीं किया गया जबकि लूट का कारण फूट है, फूट का पहला कारण जाति-व्यवस्था है। जाति-व्यवस्था से ही जातिवादी राजनीति पैदा होती है। जातिवादी राजनीति से ही भ्रष्ट राजनीति जन्म लेती है और भ्रष्ट राजनीति से ही भ्रष्टाचार पैदा होता है। ये सभी आन्दोलन आधे-अधूरे सफल हुये क्योंकि इन आन्दोलनों में जाति-व्यवस्था को उखाड़ने का कुछ भी प्रयास नहीं किया गया। आगे भी और आन्दोलन होते रहेंगे, देश लुटता रहेगा, हिन्दुस्तानी शोषण और गरीबी में फंसा रहेगा। इसलिए जाति-व्यवस्था को उखाड़ फेंकने के लिये एक व्यवस्था बनाने की आवश्यकता है।
"एकजुट आरक्षण नीति" से जाति-व्यवस्था का नाश होगा, इन्सानियत की स्थापना होनी शुरु हो जाएगी इसलिए जाति-भेद से मुक्ति के लिये "एकजुट आरक्षण नीति" जरुरी है। अगर जाति-भेद को खत्म करने के लिये "एकजुट आरक्षण नीति" से बेहतर कोई और व्यवस्था हो तो उसे स्वीकार कर लेना चाहिए। "एकजुट आरक्षण नीति" ही एकजुटता का अचूक उपाय है। इससे ही हम एकजुट हो सकते हैं। "एकजुट आरक्षण नीति" के निम्न कुछ सूत्र हैं:-

  1. आरक्षण नीति चार वर्गों में हो - अति-दलित, दलित, अति-पिछड़ा, पिछड़ा वर्ग।
  2. अति-दलित वर्ग के सदस्य को तभी अति-दलित का आरक्षण मिले जब वह अति-दलित या अन्य वर्ग में अन्तर्जातीय विवाह करे। इसी तरह दलित, अति पिछड़ा और पिछड़ा वर्ग के सदस्य को आरक्षण मिले।
  3. पआरक्षण का प्रतिशत अधिक से अधिक हो और हर क्षेत्र में हो। आरक्षण का लाभ अति-दलित को सबसे अधिक, उससे कम दलित को, उससे कम अति पिछड़े को और उससे कम पिछड़े को मिले। आरक्षण का लाभ इसी क्रम में मिले।
  4. यदि क्षेत्र-भेद को त्यागकर अति-दलित, अति-दलित में ही अन्तर्जातीय विवाह करता है तो उसे अति-दलित का कुछ ज्यादा लाभ मिले। इसी तरह और आरक्षित वर्ग में भी लागू हो।
  5. आरक्षण स्वयं व संतान तक सीमित रहे। संतान अन्तर्जातीय विवाह करे तो उनके बच्चों को उस वर्ग के आरक्षण का लाभ मिले।
  6. माँ की जाति, पिता की जाति, दादी की जाति और नानी की जाति इन चार जातियों को छोड़कर विवाह होना चाहिये।
  7. सामान्य वर्ग का व्यक्ति जिस वर्ग का आरक्षण लेना चाहता है वह उस वर्ग में विवाह करे।
  8. अचल सम्पत्ति केवल महिलाओं के नाम हो या महिलाआंे के नाम पर रजिस्ट्री(बैनामा) फ्री हो और बैंक से जल्दी ब्याज रहित ऋण की सुविधा हो जिससे महिला और पुरुष सुरक्षा मजबूत होगी।


2. पढ़ाई-दवाई-एक खिलाई एक समान व फ्री कराना - (इससे योग्य ही सफल होंगे, काबिल ही कामयाब होंगे।) 
शिक्षा-भेद को खत्म करने के लिये देश में पढ़ाई एक समान और निःशुल्क होनी चाहिए जिससे मनुष्य कुंठाग्रस्त ना हो। देश में एक समान और बिना मोल की पढ़ाई से ही काबिल लोग आगे आएंगे और कामयाब होंगे। आज जो कामयाब है जरुरी नहीं कि वह काबिल भी हो। कामयाब तो आज लूट (भ्रष्टाचार) के बल पर भी हो जाते हैं। योग्य और सफल इन दोनों में जमीन-आसमान का अन्तर है। जो केवल कामयाब है काबिल नहीं, वो ही लूट करता है, करवाता है।
एक अमीर का बच्चा जो पढ़ाई पढ़ रहा है वही पढ़ाई एक गरीब का बच्चा भी पढ़े। पढ़ाई एक समान हो और निःशुल्क हो। पढ़ाई असमान और मोल की नहीं होनी चाहिये इससे भेदभाव उत्पन्न होता है। आज शिक्षा एक व्यापार बन गया है, क्वदंजपवद के नाम पर रिशवत ली जा रही है। प्राचीन काल में हमारे यहाँ शिक्षा-भेद नहीं था। राजा और प्रजा के बच्चे एक साथ पढ़ते थे। पढ़ाई की सारी सुविधाएं समान थी। कृष्ण और सुदामा एक जैसी सुविधा के साथ एक ही स्कूल में पढ़ते थे। उस समय हमारा गौरव काल था। प्रतिभाएं निखरकर सामने आती थी। आज असमान और मोल की पढ़ाई के कारण ही गरीब बच्चों के अन्दर की प्रतिभा उनके अन्दर ही छुपी रह जाती है। आज चिकित्सा में भी भेदभाव हो रहा है जिसके पास धन है वह अपना इलाज अच्छी जगह करा लेता है लेकिन जो गरीब है वह चिकित्सा के अभाव में गंभीर बिमारियों की चपेट में आकर दम तोड़ देता है। आज हमारी कमाई का लगभग 60.70% हिस्सा पढ़ाई और दवाई पर ही खर्च हो जाता है। 
वर्तमान में चिकित्सा का भी व्यापारीकरण हो गया है। आज इलाज कराना बहुत मुश्किल है। अतः आज पढ़ाई और दवाई का एक समान साधन सहित निःशुल्क होना बहुत जरुरी है। अगर पढ़ाई और दवाई फ्री हो जाये तो आधे से ज्यादा भ्रष्टाचार तुरन्त समाप्त हो जाएगा। हमें अपने हक को जरूर लेना चाहिये। अपना हक न लेना भी पाप है। हम हिन्दुस्तानी सबसे अधिक टैक्स देते हैं यहां तक की नमक तक पर टैक्स देते हैं तो ये हमारा हक है कि हमें कम से कम एक समय का भोजन एक समान और फ्री मिले। माना कोई बेरोजगार युवा है उसे पढ़ाई-दवाई तो एक समान और फ्री मिल गयी परन्तु किसी कारणवश उसका घर नहीं है तो उसके भोजन की व्यवस्था कैसे होगी ? अगर उसे एक समय का भोजन अर्थात् (दाल, रोटी, सब्जी और एक गिलास दूध) मिल जाये तो वो युवा निश्चिन्त होकर अपनी पढ़ाई कर सकेगा। परन्तु ये सब करने के लिये हमें जातिरहित एकजुट होना पड़ेगा। 
3. समय के साथ न्याय की गारण्टी कराना - (इससे अन्याय मिटेगा, भय का नाश होगा।) 
देश में असुरक्षा का मुख्य कारण न्याय का समय सीमा में न बंधा होना है। आज न्याय के विषय में यह धारणा है कि अगर न्याय चाहिये तो "पैर लोहे के और हाथ सोने के होने चाहिए" अर्थात प्रतीक्षा करने की हिम्मत जरुरत से ज्यादा हो और खर्च करने के लिए अधिक पैसा होना चाहिए। 
आज अगर कोई निर्दोष व्यक्ति आरोपी बन रहा है तो उसे न्याय के लिये लम्बी प्रतीक्षा करनी पड़ती है। जो दोषी हैं उन्हें दण्ड मिलने में लम्बा समय लग जाता है। अगर समय के साथ न्याय की गारण्टी का अधिकार मिल जाये तो तारीख कम मिलेंगी, न्याय जल्दी होगा। देश खुशहाल होगा, भय का माहौल समाप्त होगा। आज आम आदमी अत्याचार सहता है, अत्याचार देखता है लेकिन चुप रहता है क्योंकि वह कोर्ट कचहरी की समय रहित प्रक्रिया में नहीं पड़ना चाहता। उसे पता है कि इसमें समय और धन दोनों ज्यादा लगेंगे। इतनी उसकी हैसियत नहीं होती इसलिए वह यह सब चुपचाप सहता है। फिर वह अपने बच्चों के लिये गलत रास्ते से जीने के अवसर को भी अपना लेता है जिससे समाज में नैतिकता का पतन हो रहा है। 

जन पूजा के तीनों सूत्रों को लागू कराने से जन मजबूत होगा।

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श्री परमधाम

अरिहंत पुरम,वलीदपुर दौराला,
जिला. मेरठ
, उत्तर प्रदेश (भारत)

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