जनेऊँ क्रांति परिचय

Paramdham|Janeu Kranti
चन्द्रमोहन (क्रांतिगुरु)

श्री परमधाम, अरिहंतपुरम, वलीदपुर दौराला, मेरठ, उत्तर प्रदेश

ने - नैतिक पूजा - क्रांतिकारियों का सम्मान यह है -


1. क्रांतिकारियों को हृदय से अपना वास्तविक माता-पिता मानना। 
2. नशे का त्याग करना क्योंकि नशा करना क्रांतिकारियों का अपमान है। 
3. ढोंग का त्याग करना क्योंकि ढोंग करना क्रांतिकारियों का अपमान है। 

1. क्रांतिकारियों को हृदय से अपना वास्तविक माता-पिता मानना - 
नैतिक बनने के लिए सबसे पहले हम क्रांतिकारियों को अपना वास्तविक माँ-पिता माने क्योंकि कोई सांसारिक माता-पिता भी अपने बच्चों के लिए इतने कष्ट नहीं सह सकते जितने कष्ट इन्होंने हमारे सम्मान के लिए सहे। इन क्रांतिकारियों ने हमारे लिए घोर कष्टों को सहन किया ताकि हम सम्मानित जीवन जी सकें।
2. नशे का त्याग करना क्योंकि नशा करना क्रांतिकारियों का अपमान है - 
नैतिक पूजा का दूसरा कार्य हैं कि हम नशे का त्याग करें क्योंकि नशा करना क्रांतिकारियों का घोर अपमान है। वे सभी पदार्थ जो मन, बुद्धि, शरीर पर हानि पहुंचाते है वह नशा है। नशा करने वाला मनुष्य न तो स्वयं के प्रति जागरुक होता है और न ही देश, समाज व धर्म के प्रति। आज संसार में सबसे ज्यादा युवा व उपजाऊ भूमि हिन्द में है इसलिये विदेशी ताकतें हिन्द की उपजाऊ भूमि पर कब्जा करने के लिये हिन्द के युवाओं को नशे और जाति-व्यवस्था में डुबो रहे हैं। विदेशी ताकतें नशे की सप्लाई विशाल रुप से हिन्द के कोने-कोने में कर रही हैं।
हिन्द के युवाओं को बर्बाद किये बिना कोई भी विदेशी शक्ति हिन्द पर कब्जा नहीं कर सकती, शोषण नहीं कर सकती। हिन्द का युवा केवल नशे व जाति-व्यवस्था में फंसकर ही बर्बाद हो सकता है और किसी भी तरह नहीं। आज गांव-गांव में नशे के कैप्सूल, शराब और न जाने किस-किस तरह का नशा आसानी से बिक रहा है। हिन्द की युवा पीढ़ी को नशे की गर्त में झोंका जा रहा है। नशा करने वाला मनुष्य न तो स्वयं के प्रति जागरुक होता है और न ही देश, समाज व धर्म के प्रति। 

इसलिए पहले हम स्वयं नशा मुक्त बनें व औरों को नशा मुक्त होने को प्रेरित करें।

                                                              "जवानी खतरे में, नशे के कब्जे में।"

                                                                 "बचो नशे से, जियो मजे से।"


3. ढोंग का त्याग करना क्योंकि ढोंग करना भी क्रांतिकारियों का अपमान है - 
नैतिक पूजा का तीसरा कार्य है कि हम ढ़ोंग अर्थात गैर-जिम्मेदारी, पाखण्ड व बनावट का त्याग करें। हम चाहते तो हैं कि देश में भगत सिंह होना चाहिये चन्द्रशेखर आजाद होना चाहिये, देश में आतंक, गरीबी, शोषण का नाश होना चाहिये, जाति-व्यवस्था का नाश होना चाहिये...चाहिये...चाहिये करेगा कौन? हम बस चाहते हैं पर जिम्मेदारी नहीं लेते ये ही गैर जिम्मेदारी है। हम दिखाते हैं कि हम देश के विषय में सोचते हैं परन्तु बाहर-बाहर अन्दर से देश के लिये कुछ करने की भावना नहीं होती यही बनावट है। 
यह कितना बड़ा आश्चर्य है कि हम एक तरफ तो नवरात्रों में कन्या पूजन करते हैं और दूसरी तरफ कन्या भ्रूण हत्या जैसे घृणित कार्य को करते हैं। स्त्री-पुरुष में समान आत्मा मानने वाले हम हिन्दुस्तानी दहेज का विरोध नहीं करते। दहेज लेते हैं और जरा भी नहीं हिचकते इससे बड़ा पाखण्ड और क्या होगा। ये सभी ढोंग अर्थात गैर-जिम्मेदारी, पाखण्ड व बनावट को करना क्रांतिकारियों का घोर अपमान है।  इसलिए हम ढ़ोंग का त्याग करें और जिम्मेदार बनें।

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श्री परमधाम

अरिहंत पुरम,वलीदपुर दौराला,
जिला. मेरठ
, उत्तर प्रदेश (भारत)

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