पाँच संस्कृतियाँ

Paramdham|Janeu Kranti
चन्द्रमोहन (क्रांतिगुरु)

श्री परमधाम, अरिहंतपुरम, वलीदपुर दौराला, मेरठ, उत्तर प्रदेश

पाँच संस्कृतियाँ जो केवल भारत में है।


परमात्मा की भारतवर्ष पर विशेष कृपा रही है। महान अध्यात्मिक संत समय समय पर भारतवर्ष में आये और भारत को विश्व की अध्यात्मिक राजधानी बनाया। परमात्मा ने केवल भारत में ही निम्न पॉंच संस्कृतियाँ दी
1. क्रांतिगुरु:- गुरु के महत्व का वर्णन केवल भारतवर्ष में ही हुआ । गुरु का अर्थ है जो अज्ञान को दूर करे । कलयुग में मनुष्य अज्ञान में बुरी तरह लिप्त है । महान पुरुषों को परमात्मा ने मनुष्य जाति के उद्धार के लिए समय समय पर पृथ्वी पर भेजा। त्रेतायुग में श्री रामचन्द्र जी, द्वापर में श्री कृष्ण चन्द्र जी व कलयुग में महात्मा बुद्ध, ईसा मसीह, चैतन्य महाप्रभु, गुरु गोविन्द सिंह जी, संत कबीरदास, संत रविदास इत्यादि समय समय पर समाज के उत्थान के लिए इस धरती पर आये । 

2. गाय:- संसार में अकाल पुरुष (परमात्मा) की चमत्कारिक शक्ति का एक उदाहरण है पूर्णगााय (हिन्दुस्तानी गाय)। परमात्मा ने हिन्दुस्तानी गाय के रूप में अपना "मैडिकल स्टोर" इस भूमि पर उतारा। गाय का दूध, दही, मक्खन, घी, लस्सी, यहाँ तक कि उसका गोबर व गौमूत्र भी इंसान के लिये बहुत ही उपयोगी है और इनसे असाध्य रोगों को ठीक करने में भी मदद मिलती है। 

3. गीता:- गीता अध्यात्मिकता पर एक पूर्णग्रन्थ है। इसके द्वारा आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति और मनुष्य को अपना जीवन कैसे व्यतीत करना चाहिए, का ज्ञान प्राप्त होता है। गीता में जीवन जीने की कला व मानव जीवन के प्रत्येक पहलू का पूर्ण दर्शन है। गीता का वास्तविक अर्थ इसको रटना नहीं बल्कि इसका अनुसरण करना है। हम अपनी बुद्वि तथा अंहकार के अनुसार गीता का भाष्य करते हैं, इसलिये भटक रहे हैं। यह बहुत ही अनूठा, वैज्ञानिक संवाद है जो विशेषतः कलयुग के मनुष्यों के लिये पूर्णगुरू द्वारा कहा गया है। श्रीकृष्ण अर्थात पूर्णगुरू, अर्जुन अर्थात शिष्य का संकेत है। कौरवों का अर्थ है क्लेश तथा दुर्योधन अर्थात मन से उत्पन्न सबसे बड़ा क्लेश अभिमान। अभिमान को बुद्धि से नहीं जीता जा सकता है, पूर्णगुरू की शरण लेने पर ही जीता जा सकता है। 

4. गायत्री:- गायत्री दो प्रकार की गायत्री से मिलकर बनती है, पहली जपा और दूसरी अजपा गायत्री है। जपा गायत्री से आशय उस गायत्री से है जिसे हम होंठ, जीभ, कंठ, अथवा मन से जप सकते हैं। जिसे हम गायत्री महामन्त्र भी कहते हैं। ऊँ..... भूर्भुवः स्वः, ऊँ..... तत्सवितुर्वरेण्यं, ऊँ..... भर्गो देवस्यः धीमहि, ऊँ ..... धियो यो नः प्रचोदयात, ऊँ.................................. इसके अतिरिक्त एक होती है अजपा गायत्री जिसे परमात्मा का सच्चा नाम भी कहा गया। इसको होंठ जीभ, मन आदि से नहीं जप सकते क्योंकि ये हमारी श्वासों में स्वतः चल रही है। इसे ही परमात्मा का सच्चा नाम भी कहते हैं। ये दो अक्षर हमारी श्वांस पर विराजमान है जिनको केवल हमें सुनना होता है। इन दो अक्षरों का परिचय पूर्णगुरू की शरण में जाकर मिलता है। 

5. गंगा:- संसार में अकाल पुरुष ने अपनी अधिक चमत्कारिक शक्तियों का प्रदर्शन भारतभूमि में ही किया जिसमें एक है श्री गंगा जी। श्री गंगा जी परमात्मा का प्रसाद है, परमात्मा का चमत्कार है। इसलिये श्री गंगा जी में स्नान नहीं करना चाहिए। श्री गंगा जी गोमुख से लेकर गंगासागर तक हैं, परन्तु वर्तमान में यदि हम शुद्धता बात करें शायद गोमुख तक ही गंगा जी शुद्ध रह गयी है। आज गंगा जी में जितना प्रदूषण बढ़ता जा रहा है, शायद किसी और नदी में हो, कारण है गंगा जी को पाखण्ड बनाना और उसे पूजना आरम्भ कर देना। अगर हमने 100 भूखे मनुष्यों का भोजन कराया, फिर 1 किलो गन्दी वस्तु श्री गंगा जी में डाल दी तो हमारा 100 मनुष्यों का पुण्य फल पाप फल में बदल जायेगा। श्री गंगा जी के किनारे चप्पल, जूते बहुत दूर रख दें या थैले में, कागज में लपेट कर रखें। फिर श्री गंगा जी के किनारे जाये व गंगा जल का प्रसाद पीयें। श्री गंगा जी में स्नान न करें बल्कि गंगा जल को दूर ले जाकर स्नान करें जहाँ से स्नान का जल पुनः श्री गंगा जी में न पहुँचे।

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श्री परमधाम

अरिहंत पुरम,वलीदपुर दौराला,
जिला. मेरठ
, उत्तर प्रदेश (भारत)

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